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श्री कृष्ण कृपा कटाक्ष अर्थ सहित – Shri Krishan Kripa Kataksh With Meaning

(श्लोक – 1)व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं, स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव नन्दनन्दनम्।सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं, अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम्॥1॥ भावार्थ–व्रजभूमि के एकमात्र आभूषण, समस्त पापों को नष्ट करने

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श्री राधा कृपा कटाक्ष अर्थ सहित – Shri Radha Kripa Kataksh With Meaning

(श्लोक – 1)मुनीन्दवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणी, प्रसन्नवक्त्रपंकजे निकंजभूविलासिनी।व्रजेन्दभानुनन्दिनी व्रजेन्द सूनुसंगते, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्॥ (१) भावार्थ : समस्त मुनिगण आपके चरणों की

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श्री वृन्दावन सतलीला अर्थ सहित – Shri Vrindavan Sat Leela With Meaning

श्री वृन्दावन सतलीला में कुल 116 श्लोक है और यह वाणी रसिक संत श्रीहित ध्रुवदास जी महाराज द्वारा कृत है

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श्रीहित चौरासी जी – Shri Hit Chaurasi Ji

श्रीहित चौरासी जी श्री हित हरिवंश महाप्रभु द्वारा रचित राधावल्लभ संप्रदाय का अत्यंत पवित्र ग्रंथ है। ब्रजभाषा में लिखे गए

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