श्री बांके बिहारी जी विनय पचासा
श्री बांके बिहारी विनय पचासा एक ऐसा पाठ है जो भक्तो को मन, वचन, और कर्म को भगवान की सेवा […]
श्री बांके बिहारी विनय पचासा एक ऐसा पाठ है जो भक्तो को मन, वचन, और कर्म को भगवान की सेवा […]
।। 1 ।।द्वादश चन्द्र, कृतस्थल मंगल,बुद्ध विरुद्ध, सुर-गुरु बंक।यद्दि दसम्म भवन्न भृगू-सुत, मंद सु केतु जनम्म के अंक।।अष्टम राहु, चतुर्थ
॥1॥ब्रजाधिराज – नन्दनाम्बुदाभ गात्र चंदना- नुलेप गंध वाहिनीं भवाब्धि बीज दाहिनीम् । जगत्त्रये यशस्विनीं लसत्सुधा पयस्विनीं- भजे कलिन्द नन्दिनीं दुरंत
श्री वृन्दावन सतलीला में कुल 116 श्लोक है और यह वाणी रसिक संत श्रीहित ध्रुवदास जी महाराज द्वारा कृत है
(श्लोक – 1)मुनीन्दवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणी, प्रसन्नवक्त्रपंकजे निकंजभूविलासिनी।व्रजेन्दभानुनन्दिनी व्रजेन्द सूनुसंगते, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्॥ (१) भावार्थ : समस्त मुनिगण आपके चरणों की
(श्लोक – 1)व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं, स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव नन्दनन्दनम्।सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं, अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम्॥1॥ भावार्थ–व्रजभूमि के एकमात्र आभूषण, समस्त पापों को नष्ट करने
।।दोहा।। श्री राधे वुषभानुजा , भक्तनि प्राणाधार ।वृन्दाविपिन विहारिणी , प्रानावौ बारम्बार ।।जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिय सुखधाम ।चरण शरण
।।1।।जोई-जोई प्यारौ करै सोई मोहि भावै,भावै मोहि जोई सोई-सोई करै प्यारे ।मोकों तो भावती ठौर प्यारे के नैंनन में,प्यारौ भयौ