व्याहुला के पद – Vyahula Ke Pad

व्याहुला उत्सव क्या होता है क्यों और कब मनाते हैं ?

श्री हरिवंश, श्री राधा वल्लभ मंदिर में होने वाला व्याहुला उत्सव तो शायद आप सभी ने देखा होगा मगर क्या आप यह जानते हैं कि व्याहुला उत्सव क्या होता है क्यों मनाते हैं कब मनाते हैं

वृंदावन के सभी मंदिरों में एकमात्र श्री राधा वल्लभ मंदिर ही ऐसा मंदिर है जहां पर नित्य रात्रि को बहुत ही सुंदर मधुर समाज गायन की परंपरा शुरू से चली आ रही है यहां पर प्रत्येक दिन कोई ना कोई उत्सव मनाया जाता है और इन सभी में व्याहुला उत्सव सबसे ज्यादा प्रचलित है ब्यावला उत्सव में श्री जी ( श्री राधा रानी ) और लाल जी ( श्रीकृष्ण जी ) का विवाह कराया जाता है और यह बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है जब भी व्याहुला उत्सव मनाते हैं उस दिन मंदिर को बड़ा ही सुंदर सजाते हैं श्री राधा वल्लभ लाल जी के मुखारविंद पर सहरा बांधा जाता है और उनके समक्ष व्याहुला महोत्सव के पद गाए जाते हैं यह बड़ा ही आनंददायक होता है

व्याहुला उत्सव मनाने का कोई विशेष समय नहीं है और आपने तो अक्सर देखा भी होगा कि श्री राधा वल्लभ मंदिर में हर दूसरे-तीसरे दिन ब्यावला उत्सव मनाया जाता है ऐसा माना जाता है कि जो व्याहुला उत्सव होता है वह राधावल्लभ संप्रदाय के लोग भी मनाते हैं और राधावल्लभ संप्रदाय जिसमें श्री जी की जो उपासना है वह सखी भाव की उपासना है श्री राधावल्लभ संप्रदाय श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने शुरू किया था और इसमें श्री राधा रानी के भाव पर ही जोर दिया जाता है कहते हैं जिस प्रकार गोपिकाएं अपना सब कुछ त्याग कर केवल श्री राधा माधव का सुख चाहती हैं उसी प्रकार इस संप्रदाय में भी जो सेवा की जाती है जो उपासना की जाती है वह सखी भाव से की जाती है और सखी भाव में जो सखियां है वह युगल की सेवा करती हैं

कहते हैं एक बार श्री राधा वल्लभ लाल की सखियों के हृदय में यह इच्छा हुई कि हम नित्य दंपति श्री राधा वल्लभ लाल के विवाह उत्सव की रचना करें और यह बात उसने सभी सखियों बताई यह बात सभी सखियों को बहुत अच्छी लगी विवाह उत्सव के बाद से सभी का हृदय बहुत प्रसन्नता से भर गया कि राधा वल्लभ लाल की इन सखियों को अपने प्रिय राधा वल्लभ लाल की सेवा के अतिरिक्त और कुछ भी अच्छा नहीं लगता वह तो हमेशा ही श्री राधा वल्लभ लाल जी के प्रेम में भी रहने के कारण न तो कितने दिन का बोध होता है और ना ही रात्रि का वह तो निरंतर इसे असाधारण सुख को प्राप्त करती रहती हैं

ऐसा भी कहा जाता है कि श्री राधा वल्लभ मंदिर में जो व्याहुला उत्सव होता है वह आप भी करा सकते हैं ऐसा भी कहा जाता है कि जब किसी को विवाह करना होता है या किसी का विवाह नहीं हो गया रहता है तो वह भी श्री राधा वल्लभ मंदिर में व्याहुला उत्सव कराते हैं या फिर श्री जी का विवाह करना होता है वह श्री राधा वल्लभ मंदिर में श्री राधा वल्लभ लाल जी के समक्ष विवाह करते हैं और उनका ब्यावला कराते हैं यह ब्यावला उत्सव बहुत ही सुंदर होता है और इसमें जो पद गाए जाते हैं उनके तो बात ही अलग है इसलिए जब भी आप वृंदावन जाइएगा वहां अगर श्री राधा वल्लभ लाल जी के मंदिर में ब्यावला उत्सव हो रहा हो तो उसमें जरूर सम्मिलित हुए होगा वह बड़ा ही सुंदर होता है और बड़ा ही आनंद देने वाला होता है और वैसे भी श्री राधा वल्लभ लाल जी का सौंदर्य तो एक ऐसा महासागर है जहां दिव्य प्रेम की लहरें सदा बहती है और हमेशा बढ़ती रहती हैं उनके दर्शन करने से मन दिव्य प्रेम से भर जाता है श्री राधा वल्लभ लाल जी की उपस्थिति उनकी निकटता किसी के भी जीवन को आत्मनिर्भर बनाती है और सब प्रकार के दोषों से मुक्त करती है

व्याहुला ( विवाह उत्सव ) के पद

खेलत रास दुलहिनी दूलहु ।
सुनहु न सखी सहित ललितादिक,
निरखि-निरखि नैननि किन फूलहु ॥ १॥
अति कल मधुर महा मोहन धुनि,
उपजत हँस सुता के कूलहु ।
येई-येई वचन मिथुन मुख निसरत,
सुनि-सुनि देह दसा किन भूलहू ॥ २॥
मृदु पदन्यास उठत कुंकुम रज,
अद्भुत बहत समीर दुकूलहु ।
कबंहु श्याम श्यामा दशनांचल,
कच-कुच-हार छुबत भुज मूलहु ॥ ३॥
अति लावण्य रूप अभिनय गुन,
नाहिन कोटि काम समतूलहु ।
भृकुटि विलास हास रस बरसत,
(जैश्री) हित हरिवंश प्रेम रस झूलहु ॥ ४॥

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