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राधा अष्टमी 2021

आज के इस ब्लॉग में आपको ये सब मिलेगा !


  • राधाष्टमी का व्रत कब करे ?
  • राधा अष्टमी के दिन क्या करें
  • कहाँ हुआ किशोरी जी का प्राकट्य ?
  • श्री राधाकृष्ण क्‍यों गए बरसाना ?
  • बरसाना के महल में राधा अष्टमी के उत्सवों कब है ?
  • श्री राधाजी की आरती

श्री राधा जी के बारे में प्रचलित है कि वह बरसाना की थीं लेकिन सच्चाई है कि उनका जन्‍म बरसाना से पचास किलोमीटर दूर हुआ था।

यह गांव रावल के नाम से प्रसिद्ध है। यहां पर राधा जी का जन्‍म स्‍थान है।



राधाष्टमी का व्रत कब करे ?

तिथि आरंभ- 13 सितंबर 2021 दोपहर 3 बजकर 10 मिनट से
तिथि समाप्त – 14 सितंबर 2021 दोपहर 1 बजकर 9 मिनट तक

व्रत आरंभ- 13 सितंबर 2021 रात 12 बजे से
व्रत समाप्त – 14 सितंबर 2021 सुबह 4 बजे तक


राधा अष्टमी के दिन क्या करें

हम ज्यादा नियमो में विश्वास नहीं करते है पर कुछ जरुरी नियम जरुर पालन करे

  • राधा अष्टमी के दिन सुबह जल्द उठकर स्नान करना चाहिए।
  • फिर स्वस्छ वस्त्र पहनें और राधारानी और भगवान कृष्ण के व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद राधा और कान्हा की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं और श्रृंगार करें।
  • वह धूप, दीप, अक्षत, पुष्प, फल और प्रसाद अर्पित करें।
  • श्रीराधा कृपाकटाक्ष स्तोत्र का पाठ करें

कैसे हुआ किशोरी जी का प्राकट्य ?

कमल के फूल पर जन्‍मी थीं श्री राधा रानी, रावल गांव में राधा जी का मंदिर है। माना जाता है कि यहां पर राधा जी का जन्म हुआ था। पांच हजार वर्ष पूर्व रावल गांव को छूकर यमुना जी बहती थी। राधा जी की मां कृति यमुना में स्‍नान करते हुए अराधना करती थी और पुत्री की लालसा रखती थी। पूजा करते समय एक दिन यमुना से कमल का फूल प्रकट हुआ। कमल के फूल से सोने की चमक सी रोशनी निकल रही थी। इसमें छोटी बच्‍ची के नेत्र बंद थे। अब वह स्‍थान इस मंदिर का गर्भगृह है। इसके ग्यारह माह पश्चात् तीन किलोमीटर दूर मथुरा में कंस के कारागार में भगवान श्री कृष्‍ण जी का जन्‍म हुआ था व रात में गोकुल में नंदबाबा के घर पर पहुंचाए गए। तब नंद बाबा ने सभी स्थानों पर संदेश भेजा और कृष्‍ण का जन्‍मोत्‍सव मनाया गया। जब बधाई लेकर वृषभानु जी अपनी गोद में राधारानी को लेकर यहां आए तो राधारानी जी घुटने के बल चलते हुए बालकृष्‍ण के पास पहुंची। वहां बैठते ही तब राधारानी के नेत्र खुले और उन्‍होंने पहला दर्शन बालकृष्‍ण का किया।


श्री राधाकृष्ण क्‍यों गए बरसाना

कृष्‍ण के जन्‍म के बाद से ही कंस का प्रकोप गोकुल में बढ़ गया था। यहां के लोग परेशान हो गए थे। नंदबाबा ने स्‍थानीय राजाओं को एकत्रित किया। उस समय ब्रज के सबसे बड़े राजा वृषभानु जी थे। इनके पास ग्यारह लाख गाय थीं। जबकि नंद जी के पास नौ लाख गाय थीं। जिसके पास सबसे अधिक गाय होतीं थीं, वह वृषभान कहलाते थे। उससे कम गाय जिनके पास रहती थीं, वह नंद कहलाए जाते थे। बैठक के बाद निर्णय हुआ कि गोकुल व रावल छोड़ दिया जाए। गोकुल से नंद बाबा और जनता पलायन करके पहाड़ी पर गए। उसका नाम नंदगांव पड़ा। वृषभान, कृति जी राधारानी को लेकर पहाड़ी पर गए। उसका नाम बरसाना पड़ा।

रावल में मंदिर के सामने बगीचा, इसमें पेड़ स्‍वरूप में हैं राधा व श्‍याम

रावल गांव में राधारानी के मंदिर के ठीक सामने प्राचीन उपवन है। कहा जाता है कि यहां पर पेड़ स्‍वरूप में आज भी श्री राधा जी और श्री कृष्‍ण जी विद्यमान हैं। यहां पर एक साथ दो वृक्ष हैं। एक श्‍वेत है तो दूसरा श्‍याम रंग का। इसकी पूजा होती है। माना जाता है कि श्री राधा जी और श्री कृष्‍ण जी वृक्ष स्‍वरूप में आज भी यहां से यमुना जी को निहारते हैं।


चहक उठी है सृष्टि सारी। बज उठी है देखो शहनाई।
कीरत जू के अंगना में। नन्ही-सी लाली है जाई।
सब मिल कर गाओ बधाई।

आँखों मे बस गया नज़ारा आज अटारी का। धरती पर अवतार हुआ वृषभानु दुलारी का।
झूमो नाचो गाओ जन्मदिन श्यामा प्यारी का।


बरसाना के महल में राधा अष्टमी के उत्सव कब है ?


  • 12 सितंबर ऊंचागांव में राधारानी की प्रधान सखी – ललिताजी का जन्मोत्सव ।
  • 13 सितंबर सुप्रसिद्ध राधारानी मंदिर में राधा जन्मोत्सव |
  • 14 सितंबर राधारानी मंदिर में प्रात: राधाजी का जन्म एवं शाम को संगमरमरी छतरी में विशेष दर्शन।
  • 15 सितंबर मोर कुटी पर मयूर लीला का मंचन, शाम को लाड़िलीजी मंदिर में ढ़ांढ़ी ढ़ाढिन नृत्य।
  • 16 सितंबर विलासगढ़ एवं नागजी कुटी में जोगिन लीला।
  • 17 सितंबर सांकरी खोर में चोटी गूंथन लीला एवं शाम को गाजीपुर में नौका विहार लीला।
  • 18 सितंबर ऊंचा गांव में व्याहवला लीला एवं शाम को प्रिया कुण्ड पर नौका विहार लीला।
  • 19 सितंबर साांकरी खोर में मटकी फोड़ लीला एवं विशाल दंगल का आयोजन।
  • 20 सितंबर– राजस्थान के कदमखंडी में चीरहरण लीला का मंचन।
  • 21 सितंबर – राधाबाग, करहला एवं मड़ोई गांव में महारास का आयोजन।

श्री राधाजी की आरती

आरती राधाजी की कीजै। टेक…कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा।
आरती वृषभानु लली की कीजै। आरती…कृष्णचन्द्र की करी सहाई, मुंह में आनि रूप दिखाई।
उस शक्ति की आरती कीजै। आरती…नंद पुत्र से प्रीति बढ़ाई, यमुना तट पर रास रचाई।
आरती रास रसाई की कीजै। आरती…प्रेम राह जिनसे बतलाई, निर्गुण भक्ति नहीं अपनाई।
आरती राधाजी की कीजै। आरती…दुनिया की जो रक्षा करती, भक्तजनों के दुख सब हरती।आरती दु:ख हरणीजी की कीजै। आरती…दुनिया की जो जननी कहावे, निज पुत्रों की धीर बंधावे।
आरती जगत माता की कीजै। आरती…निज पुत्रों के काज संवारे, रनवीरा के कष्ट निवारे।
आरती विश्वमाता की कीजै। आरती राधाजी की कीजै…

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